कभी -कभी हम अपनी जिंदगी को अपने तरीके से जीने के फैसले में अपना पूरा जीवन पतन की और ले जाते हैं ||
खुद के लिए जीना अच्छी बात हैं
लेकिन अगर उसमे दूसरे के लिए जीना आ जाये तो जीवन लाजवाब हो जाये,
हैं ना ||
एक किनारे से खुद को सवारों
एक किनारे से दुसरो को सवारों
तो जीवन में संतुलन बना रहता हैं
वरना एक और का खिचाव सिर्फ गिराता हैं
और ,
गिरना इत्तेफाक होना चाहिए
स्वभाव नहीं ||
प्रिया मिश्रा :) :)
खुद के लिए जीना अच्छी बात हैं
लेकिन अगर उसमे दूसरे के लिए जीना आ जाये तो जीवन लाजवाब हो जाये,
हैं ना ||
एक किनारे से खुद को सवारों
एक किनारे से दुसरो को सवारों
तो जीवन में संतुलन बना रहता हैं
वरना एक और का खिचाव सिर्फ गिराता हैं
और ,
गिरना इत्तेफाक होना चाहिए
स्वभाव नहीं ||
प्रिया मिश्रा :) :)
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