तू धवल चमकता चाँद हैं
मैं धूमिल घटा की चांदनी

तू सरल हैं तू सुन्दर हैं
मैं तेरे आँगन की साँझ री ||

तू छाया मेरे आँगन का
मैं धुप में जलती रेत  री ||

तुम कंचन हो
मैं काया हूँ ||

तुम भगवन हो मेरे
मैं माया हूँ ||

तुम प्रीत हो , तुम जित हो
मैं काली सी , घटाओ में लिपटी कोइ हार की छाया हूँ ||

तू धवल चमकता चाँद हैं
मैं धूमिल घटा की चांदनी ||

तुम कंचन  हो
मैं काया हूँ ||

प्रिया मिश्रा :)

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