तू धवल चमकता चाँद हैं
मैं धूमिल घटा की चांदनी
तू सरल हैं तू सुन्दर हैं
मैं तेरे आँगन की साँझ री ||
तू छाया मेरे आँगन का
मैं धुप में जलती रेत री ||
तुम कंचन हो
मैं काया हूँ ||
तुम भगवन हो मेरे
मैं माया हूँ ||
तुम प्रीत हो , तुम जित हो
मैं काली सी , घटाओ में लिपटी कोइ हार की छाया हूँ ||
तू धवल चमकता चाँद हैं
मैं धूमिल घटा की चांदनी ||
तुम कंचन हो
मैं काया हूँ ||
प्रिया मिश्रा :)
Very beautiful thought...
ReplyDeleteSuchitra Pandey..😍😘
Correct
ReplyDeletethank you g :)
ReplyDeleteवाह! बहुत सुंदर प्रिया जी 👌👌
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