दिवाली
दिवाली दीपो का त्वोहार फिर क्यों ऐसे मनाया जाता हैं || बिजली के बल्ब होते हैं | दूसरे देशों की लाइट होती हैं
अपने देश की मिटटी के दिए क्यों नहीं बिकते | क्यों जो दिए बनाते हैं उनके ही घर में अँधेरा होता हैं |
अपने देश की मिटटी की कीमत यहाँ भी क्यों कम आकि जाती हैं ||
जवाब हमारे ही पास हैं | हम इतने भ्रमीत हो गए हैं ,चकाचौँध देख के की दस हजार की चीजे हमें महंगी नहीं लगती और ५ रुपये के दिए महंगे लगें लगते हैं | हम दिए की जगह मोमबतिया लगाने लगे हैं |
पेड़ो की जगह प्लास्टिक के पौधे घर में सजाने लगे हैं | नदियों को सूखा के फैक्ट्रिया लगने लगी हैं | पिने के पानी को बचने की जगह उसकी कीमत लगाने लगे हैं | अलग -अलग घरो में रहने के लिए पेड़ो को कटवाने लगे हैं |
अपने बच्चों की खुशिया को छीन के पैसे बनाने लगे हैं || घर के लिए वक़्त नहीं और बहार मौज मानाने लगे हैं |
पास के कमरे में किसी ने खाया की नहीं ये खबर नहीं सोशल मिडिया पे मिठाईया बाँट रहे हैं ||
अपने पुराने दोस्तों को त्वोहार वाले दिन भी कॉल करने की फुर्सत नहीं || माँ - बाप को झूट बोलते बहार मौज करने लगे हैं और कहते हैं
लोग बदल गए हैं यार अब पहले वाली बात नहीं रही ||
अगर पहले वाली बात चाहिए तो आप भी पहले जैसे बन जाइए
और इस बार अपने पुरे घर को दीजिये खुसियो की जगमगाहट
अपने दोस्तों को प्यार का तोहफा और उन्हें बताईये
मैं दूर हूँ पर यारी अभी बाकि हैं ||
जय हिन्द
जय भारत
प्रिया मिश्रा
दिवाली दीपो का त्वोहार फिर क्यों ऐसे मनाया जाता हैं || बिजली के बल्ब होते हैं | दूसरे देशों की लाइट होती हैं
अपने देश की मिटटी के दिए क्यों नहीं बिकते | क्यों जो दिए बनाते हैं उनके ही घर में अँधेरा होता हैं |
अपने देश की मिटटी की कीमत यहाँ भी क्यों कम आकि जाती हैं ||
जवाब हमारे ही पास हैं | हम इतने भ्रमीत हो गए हैं ,चकाचौँध देख के की दस हजार की चीजे हमें महंगी नहीं लगती और ५ रुपये के दिए महंगे लगें लगते हैं | हम दिए की जगह मोमबतिया लगाने लगे हैं |
पेड़ो की जगह प्लास्टिक के पौधे घर में सजाने लगे हैं | नदियों को सूखा के फैक्ट्रिया लगने लगी हैं | पिने के पानी को बचने की जगह उसकी कीमत लगाने लगे हैं | अलग -अलग घरो में रहने के लिए पेड़ो को कटवाने लगे हैं |
अपने बच्चों की खुशिया को छीन के पैसे बनाने लगे हैं || घर के लिए वक़्त नहीं और बहार मौज मानाने लगे हैं |
पास के कमरे में किसी ने खाया की नहीं ये खबर नहीं सोशल मिडिया पे मिठाईया बाँट रहे हैं ||
अपने पुराने दोस्तों को त्वोहार वाले दिन भी कॉल करने की फुर्सत नहीं || माँ - बाप को झूट बोलते बहार मौज करने लगे हैं और कहते हैं
लोग बदल गए हैं यार अब पहले वाली बात नहीं रही ||
अगर पहले वाली बात चाहिए तो आप भी पहले जैसे बन जाइए
और इस बार अपने पुरे घर को दीजिये खुसियो की जगमगाहट
अपने दोस्तों को प्यार का तोहफा और उन्हें बताईये
मैं दूर हूँ पर यारी अभी बाकि हैं ||
जय हिन्द
जय भारत
प्रिया मिश्रा
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