मेरी प्राथना
मेरी प्राथना बस इतनी हैं
मैं दुनिया के साथ मुस्कुराऊँ
और दुनिया मेरे साथ मुस्कुराये ||
मेरी प्राथना बस इतनी हैं
कोइ रोये भी तो मुस्कुरा के
और कोइ इतना मुस्कुराये की उसके
आँखे भर आये ||
मेरी प्राथना बस इतनी हैं
मैं किसी की लाठी का सहारा बन जाऊँ
मैं भूखे की रोटी बन के उसकी दुआएं पाऊँ ||
मैं किसी के घर की खुसिया बन जाऊँ
मैं हसूं  तो जहाँ हॅंस  दे
और मैं दुआ बन जाऊँ ||
मैं किसी की किताब बन जाऊँ
मैं किसी की कलम बन के
कागज पे उसकी स्याही  बन उतर जाऊँ
मेरी प्राथना बस इतनी हैं
की मैं मरते वक़्त भी मुस्कुराऊँ
और किसी को मुस्कराहट दे जाऊँ ||

प्रिया मिश्रा :)

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