एक शाम जब तुम मुझे तलाशोगे तो खुद को तनहा पाओगे
और मैं
मैं रात के सन्नाटे में गुजर जाउंगी |
तुम्हे मेरी उफ़  तक सुनाई देगी
जाते - जाते
तो तुम्हे मुझसे दूर कर दूँ
जिंदगी तो अलग ना कर पाई मुझे तुमसे
और बंधन चाहते नहीं
तो आजाद हो अब तुम
आजाद
और मैं भी आजाद हूँ
खुद की मजबूरियों से

प्रिया मिश्रा :)

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