मैं खो बैठा ||

 मैं सुबह के इन्तजार में
 शाम का नजारा खो बैठा

मैंने तुझे खोया
और
पंछियों  का नजारा खो बैठा ||

तू  सुबह बन के आई
मैं शाम में ठहरा रहा
और
मैं सुबह  के इन्तजार में
शाम का नजारा खो बैठा ||

तू नदी बन के आई
मैं किनारो में अटका रहा
भूखी आँखों से पेड़ को ताकता रहा
और अब
मैं प्यास बुझाने की इन्तजार में
नदियों को ताकता रहा ||

तू सुबह बन के आई 
मैं शाम में ठहरा रहा ||

तू ख़ुशी  बन के आई
मैं गमो में उलझा रहा
और अब खुशियों के इन्तजार में
अपने सुने पन  में उलझ बैठा  ||

मैं सुबह के इन्तजार में
 शाम का नजारा खो बैठा ||

प्रिया मिश्रा :)

 

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