चाँद
चाँद की आहट  हुई हैं
रात अभी बाकि हैं ||
कोइ जगा हैं
कही किसी के
इन्तजार में
कोइ ढूंढ रहा हैं
कुछ खाने को
किसी को ठिकाने नहीं हैं
सब कुछ अधूरा हैं
बात अभी बाकि हैं
चाँद की आहट  हुई हैं
रात अभी बाकि हैं ||

बिजली चमकेगी
बादल  गरजेगा
कोइ किसी से मिलने को
शायद उम्र भर तरसेगा
यही गुजार देगा वो
रात करवटो में
वो आएगा नहीं
चाहे पलके कितनी भी भींग जाये
इम्तहां अभी बाकि हैं
चाँद की आहट हुई हैं
रात अभी बाकि हैं ||

कोइ चांदनी में नहायेगा
कोइ चाँदी  में खायेगा
फर्क बस इतना होगा
चांदनी वाला भूका होगा
और चाँदी वाला लुटायेगा
फर्क और हैं
बस सबक अभी बाकि हैं
चाँद की आहट  हुई हैं
रात अभी बाकि हैं ||

प्रिया मिश्रा :)

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