अमिया की गोद  भराई

आज शाम मैं निकली जब
बाग़ अपने घूमने को
झुकी हुई थी
अमिया
शरमाई सी , लजाई सी ||

कानो - कान खबर फैली
मंजरिया आने वाली हैं
चंपा - चमेली
सब आये हैं
अमिया की गोद भराई हैं ||

देखो तो कैसे झुकी हुई हैं
कल तक जो अल्हड़  थी
हवा में उछलती
लहराई सी दिखने वाली
आज हैं वो अमिया शरमाई सी 
बादल  -वर्षा सब आये हैं
अमिया की गोद  भराई हैं ||

ममत्वा का एहसास ये प्यारा
तनी - तनी सी अमिया
खिली - खिली सी दिखती हैं
कल तक जो उखड़ी रहती थी
आज हॅंस के सबसे मिलती हैं
भवरे - तितली
सब आये हैं
अमिया की गोद  भराई हैं ||

प्रिया मिश्रा :)


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