आज की शाम

आज की शाम
मेरे लिए उजाला हैं दिन का
वो गुजर नहीं रही हैं
वो बसेरा हैं
मेरे जित का
वो ख्याल नहीं
वो हकीकत हैं
मेरे उदय का
मेरा सूर्य शाम में उदित हुआ
मैं हारी  नहीं
कड़ी धुप में खड़ी
थी , लोग गुजरे मैं
अड़ी रही  ||
कुछ हसें
कुछ हाथ छुड़ा के निकल लिए
मैं
अकेली धुप में तपती  रही
मैं शाम तक थकी नहीं
मुझे मेरे उमीदो ने थकने नहीं दिया
मुझे मेरे इरादों ने टूटने नहीं दिया
मुझे  मेरे ख्वाबो ने जगा के रखा
इस शाम तक
और ये शाम ,
ये शाम उजाला हैं मेरे दिन  का ||

प्रिया मिश्रा :) :)

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