मैं तुझसे इस जन्म
शायद ना मिलु
मिलूंगी जरूर
कही और तुझसे ||
मैं तेरा शाया बन के चलूंगी
और तुझे समेट लुंगी
अपने आँचल में
शायद इस जन्म में न सही
कही और किसी और जन्म में
मिलूंगी जरूर तुझसे मैं ||
जब तू पवन बनेगा
मैं वर्षा बन जाउंगी
पहले तुझसे टकराऊँगी
फिर तुझे समेट के बरस जाउंगी
ये होगा ,
कही और किसी और जन्म में
मिलूंगी जरूर तुझसे मैं ||
तू चित्रफलक बनना
मैं रंग बन तुझमे सिमट जाउंगी
इस जन्म न हो पाए
एक रंगो भरा जीवन
ये होगा ,
कही और किसी और जन्म में
मिलूंगी जरूर तुझसे मैं ||
तू आत्मा बनना
मैं शरीर बनूँगी
तू काया बनना
मैं शाया रहूंगी
ये होगा ,
कही और किसी और जन्म
मिलूंगी जरूर तुझसे मैं ||
तू बादल बनना
मैं बिजली बनूँगी
तू किनारा बनना
मैं नदी बनूँगी
ये होगा
कही और किसी और जन्म में
मिलूंगी जरूर तुझसे मैं ||
तू पर्वत बनना
मैं झरना बनूँगी
तू प्रेम बनना
मैं प्रीत बनूँगी
ये होगा
कही और किसी और जन्म में
मिलूंगी जरूर तुझसे मैं ||
तू भाग्य बनना
मैं कर्म बनूँगी
तू शुर बनना
मैं ताल बनूँगी
तू चाँद बनना
मैं चांदनी बनूँगी
ये होगा ,
कही और किसी और जन्म में
मिलूंगी जरूर तुझसे मैं ||
तू हथेली बनेगा
मैं मेहन्दी बनूँगी
तू सिंदूर बनेगा
मैं मांग रेखा बनूँगी
तू और मैं साथ -साथ रहेंगे
कही और किसी और जन्म में
मिलूंगी जरूर तुझसे मैं ||
तू दाता बनना
मैं याचक बनूँगी
तू ईश्वर बनना
मैं प्राथना बनूँगी
ये होगा ,
कही और किसी और जन्म में
मिलूंगी जरूर तुझसे मैं ||
तू पूर्णिमा बनना
मैं चाँद बनूँगी
तू सूर्य बनना
मैं प्रकाश बनूँगी
तू माला बनना
मैं मोती बनूँगी
तू दिया बनना
मैं बाती बनूँगी
ये होगा ,
कही और किसी और जन्म में
मिलूंगी जरूर तुझसे मैं ||
इस जन्म ये हो न पाया
पैरो में
रश्मो की जंजीर बाँधी थी
कैसे बताती सबको
की तुझ बिन मैं आधी थी
तू मेरा पूरक था
तू सबकुछ था
मैं अधूरी थी
तुझे लेके मैं पूरी थी
तू धरकन बन धड़कता था मुझमे
मेरी यादो में तू था
मेरी मन्नतो में तू था
मेरी सांसो में तू था
पर अब ये सांसे टूटने लगी हैं
जो बची आस थी वो छूटने लगी हैं
कुछ देर में ही
तू मुझमें अब ना रहेगा
जब मेरा शरीर वो पार्थिव होगा
पर जब मैं मुक्त हो जाउंगी
बंधनो से छूट जाउंगी
बस तेरी रहूंगी
और आत्मा में तेरे घुल जाउंगी
ये होगा ,
अगले जन्म नहीं
इसी जन्म होगा
जब तू होगा
और तुझमे सिमटी मैं होउंगी
तेरी रूह की तरह ||


प्रिया मिश्रा :)

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