तो मैं क्या न खुद को सवारु

मैं क्यों न खुद को सवारु
मुझे बनाया बनाने वाले ने
फुर्सत से ,
उसकी इस मेहनत
को क्यों मैं जाया करू
मैं क्यों न खुद को सवारु ||

मुझसे बेहतर ये दुनिया होगी
मान लेती हूँ सबकी बात
लेकिन मैं , क्यों खुद को
कम देखु
मुझमे क्या कमी हैं
मुझे भी बनाया बनाने वाले ने
फुर्शत से तो
क्यों,
क्यों न मैं खुद को सवारू ||

आज जरा कम होंगी
कल मैं सबसे ऊपर होंगी
उनको गुरुर होगा खुद पे
मैं हर रोज एक  कदम बढ़ रही होंगी
वो खुद को आसमा समझ
बैठे हैं तन के
और
 मैं , तारा से सूर्य
और सूर्य से ब्रह्माण्ड बन जाउंगी
 मैं वो खुसबू हूँ जो दूर चमन तक जाउंगी
मुझे बनाया हैं , बनाने वाले ने
फुर्शत से
तो क्यों ,
क्यों न मैं खुद को सवारु ||

प्रिया मिश्रा :)

 

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