कभी शाम के वक़्त जब तुम्हारा वक़्त ठहर जाये
तुम सुबह की रौशनी में खो जाना
जो नई किरण महसूस करोगे
वो नई ऊर्जा ठहराव को गति में बदल देगी
और शाम उदाश से मुस्कुरा उठेगी ||

प्रिया मिश्रा

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