प्रेम पत्र
लिखने को तो लिख दूँ
लेकिन भावनाये
क्या स्याह रंग ले पाएँगी
जज्बात क्या
अक्षरों में सिमट
पाएँगे
क्या सब कुछ
लिखा जायेगा जो
अनमोल हैं
इन मूक कागजो पे
जो खुद खामोश हैं
वो कैसे समझा पायेगा
मुझे
तुम्हे
और हमें
तो क्यों न
इस पन्ने
को खाली रहने दूँ
खाली पन्ना
और खामोश शब्द
मैं लिख दूँ
और तुम मुस्कुरा दो
तो खाली कोरा पन्ना
सतरंगी हो जायेगा !!


प्रिया मिश्रा :)

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