हसीं

तेरी हसीं ऐसी हैं
जैसे चाँद का आना
मेरे दामन में तारो का जुड़ना
तेरे मुस्कराहट को मैं
टाक लू अपने दुपट्टे में
वो भी मुस्कराने लगे
 मैं ,
भी मुस्कुराने लगु |

आज कल हसी मेरी
तेरी हसीं में कही छिप गयी हैं
तू लौटा दे मुझे वो मेरी हसीं
और तू मुस्कुरा दे
की तेरी हसीं
मेरे जीने का सहारा हैं ||

प्रिया मिश्रा :)

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