गिरो नहीं
रुको नहीं
तुम साहसी हो
डरो नहीं
उठो चलो
और चिल्लाओ
इतना की आसमा फ़ट  जाये
जमी में दरार  आ जाये
और किस्मत में निखार आ जाये ||

गिरो नहीं
रुको नहीं
तुम साहसी हो
उठो चलो
और हौसला इतना रखो की
पर्वत भी काँप  जाएँ
वो छोटा समझे खुद को
और तेरे कदमो में झुक जाये ||

  गिरो नहीं
 रुको नहीं
तुम साहसी हो
उठो चलो
खून में उबाल लाओ
पसीने को इतना बहावो
की बंजर जमीं  का सीना
फट  जाये
दूध उतरे उसके सिने  से
और कोइ अंकुर कही फूट  जाये  ||

गिरो नहीं
 रुको नहीं
तुम साहसी हो
उठो चलो
पग को कुछ ऐसे बढ़ावो
की काँप  जाये ये धरती
नदियों का बहना थम जाये
तेरे में चमक हो इतनी
की ये सूरज भी फ़ीका पड़  जाये ||

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