अँधेरा

यहाँ क्या कर रही हो बिच सड़क पे
तुम आये नहीं , और मुझे अँधेरे से डर  लगता हैं | ओहो अँधेरा खा  थोड़ी जायेगा | आवो चलो बैठो और ये देखो मैं क्या लाया हूँ |
क्या हैं ये |
तुम्हारी माँ के यहाँ जाने की टिकिट खुस हो न अब |  मैं अब चला जाऊंगा अपने काम पर चला जाऊंगा |
तुमको पता हैं न हमें छुट्टी जरा काम मिलती हैं | सरहद पर हमारी जरुरत हैं | और सुनो मेरे जाने के बाद
अँधेरे से मत डरना रात को चीरते हुए सबेरा लाना | आखिर एक फौजी की बीवी हो |
अच्छा चलो अपना सामान बांध लो और मेरा भी
बस आज रात तक हूँ जी भर के बातें करेंगे
अच्छा सुनो पकौड़े बना देना प्ल्ज़ | तुम्हारे हाथो में वो जादू हैं बिन डर  के पकोड़े खता हूँ
चटनी जगाऊँ या न लगाऊं सारा चट  कर जाता हूँ ||
हो गया तुम्हारा , अब जाओ और हाथ मुँह धो लो
पकोड़े त्यार हैं ||
सिमा सिमा कहा हो तुम्हारे पकोड़े त्यार हैं
 यहाँ अँधेरे में क्या कर रही हो
तुम्हे डर  नहीं लगता
नहीं माँ वो जाते जाते कह गए थे , अँधेरे से मत डरना रात को चीरते हुए सबेरा लाना
आखिर फौजी की बीवी हूँ , थी
उसके आँखों में चमक थी
और आसुंओ में अँधेरा छा गया ||

प्रिया मिश्रा

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