मैं अकेली कहाँ हूँ
तेरी यादो को समेटे
मैं
तुझसे रोज मिलती हूँ
एक वादा करती हूँ
तेरी ही रहूंगी
फिर अपने पागलपन पे
मुस्कुराने लगती हूँ||
मैं
हर रोज तेरी बनाई गलियों से गुजरती हूँ
तुझसे तेरे बिना ही बातें करती हूँ
तुझसे शिकायते करती हूँ
और लौट आती हूँ
अकेले , कैसे लेके आऊं तुझे मेरी यादो में,
आज कल वहां भी पहरा हैं
और मुझे तुझे कैद करना पसंद नहीं
इसलिए तुझसे रोज विदा लेती हूँ ||
मैं
तेरी हर कदम को नापते हुए
किनारे -किनारे नदियों के गुजरती हूँ
वो ठहर के,
मेरे पागलपन पे हस्ती हैं
और मैं शर्मा जातीं हूँ ||
मैं
तुझमे कुछ ऐसे खो जाती हूँ की ,
हवा भी छू ले तो मैं
शर्मा जाती हूँ
मैं
अकेली कहाँ हूँ
तेरी यादो को समेटे
मैं
तुझसे रोज मिलती हूँ
प्रिया मिश्रा :)
तेरी यादो को समेटे
मैं
तुझसे रोज मिलती हूँ
एक वादा करती हूँ
तेरी ही रहूंगी
फिर अपने पागलपन पे
मुस्कुराने लगती हूँ||
मैं
हर रोज तेरी बनाई गलियों से गुजरती हूँ
तुझसे तेरे बिना ही बातें करती हूँ
तुझसे शिकायते करती हूँ
और लौट आती हूँ
अकेले , कैसे लेके आऊं तुझे मेरी यादो में,
आज कल वहां भी पहरा हैं
और मुझे तुझे कैद करना पसंद नहीं
इसलिए तुझसे रोज विदा लेती हूँ ||
मैं
तेरी हर कदम को नापते हुए
किनारे -किनारे नदियों के गुजरती हूँ
वो ठहर के,
मेरे पागलपन पे हस्ती हैं
और मैं शर्मा जातीं हूँ ||
मैं
तुझमे कुछ ऐसे खो जाती हूँ की ,
हवा भी छू ले तो मैं
शर्मा जाती हूँ
मैं
अकेली कहाँ हूँ
तेरी यादो को समेटे
मैं
तुझसे रोज मिलती हूँ
प्रिया मिश्रा :)
Nice
ReplyDeletethank you
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